Latest
Home / News / नरक चतुर्दशी को क्यों कहते हैं रूप चतुर्दशी ? जानें इसके पीछे की रोचक कथा

नरक चतुर्दशी को क्यों कहते हैं रूप चतुर्दशी ? जानें इसके पीछे की रोचक कथा

यह चतुर्दशी कार्तिक कृष्ण पक्ष में आती है|इस दिन सौंदर्य रूप श्री कृष्ण की पूजा करनी चाहिए|इस दिन व्रत भी रखा जाता है|ऐसा करने से भगवान सुन्दरता देते है|इसी दिन नरक चतुर्दशी का व्रत भी रखा जाता है|

रूप चतुर्दशी व्रत की कथा

एक समय भारत वर्ष में ‘हिरण्यगर्भ’ नामक नगर में एक योगिराज रहते थे|उन्होंने मन को एकाग्र करके भगवान में लीन होना चाहा|अतः उन्होंने समाधि लगा ली|समाधि लगाये कुछ ही दिन बीते थे कि उनके शरीर में कीड़े पड़ गये बालों में छोटे-छोटे कीड़े लग गये|आंखों के रोओं और भोहों पर जूएँ जम गई|यह दशा उन योगिराज की हो गई कि योगिराज बहुत दुखी रहने लगे|इतने ही में वहां नारद जी घूमते हुवे,वीणा और खरताल बजाते हुए आ गये|तब योगिराज बोले-हे भगवान!मैं भगवान के चिंतन में लीन होना चाहता था|परन्तु मेरी यह दशा क्यों हो गयी|

तब नारद जी बोले-हे योगिराज!तुम चिंतन करना जानते हो परन्तु देह-आचार का पालन नहीं जानते हो|इसलिए तुम्हारी यह दशा हुई है|तब योगिराज ने नारद जी से देह-आचार के विषय में पूछा|इस पर नारद जी बोले-देह आचार से अब तुम्हे कोई लाभ नहीं है|पहले तुम्हे जो मैं बताता हूँ उसे करना फिर देह-आचार के बारे में बताऊंगा|थोडा रूककर नारद जी ने कहा-इस बार जब कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी आवे तो तुम उस दिन व्रत रखकर भगवान की पूजा ध्यान से करना|ऐसा करने से तुम्हारा शरीर पहले जैसा ही स्वस्थ और रूपवान हो जाएगा|योगिराज ने ऐसा ही किया और उसका शरीर पहले जैसा ही हो गया|उसी दिन से इसको रूप चतुर्दशी कहते हैं|   

Check Also

अक्षपाद महर्षि गौतम वेद विद्यालय के तत्वावधान में हुआ श्रावणी उपाकर्म एवं यज्ञोपवीत संस्कार

अक्षपाद महर्षि गौतम वेद विद्यालय नोखा के तत्वावधान में आयोजित श्रावणी उपाकर्म एवम उपनयन संस्कार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!