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16/17 जुलाई चंद्रग्रहण की देखे सम्पूर्ण जानकारी

खण्डग्रास चंद्रग्रहण (दिखाई देने वाले )ग्रहण का विवरण इस प्रकार है –

खण्डग्रास चंद्रग्रहण (16/17 जुलाई,सन् 2019 ई)-

यह ग्रहण “ज्योतिर्विद् गजानन शास्त्री” के अनुसार 16/17 जुलाई सन् 2019 ई. को आषाढ़ –पूर्णिमा ,मंगलवार के दिन सम्पूर्ण भारत में खण्डग्रास के रूप में स्पर्श से मोक्ष तक दिखाई देगा |

इस ग्रहण के स्पर्श,मध्य एवं मोक्ष (समाप्ति )काल आदि भा.स्टै. टा.के अनुसार इस प्रकार हैं –

ग्रहण –प्रारम्भ – रात्रि 01 घं.32 मि.

ग्रहण-मध्य – रात्रि 03 घं.01 मि. (भा.स्टै.टा.)

ग्रहण-समाप्त – रात्रि 04 घं. 31 मि. (16 जुलाई,2019 ई.)

ग्रहण का पर्वकाल – 2 घं. 59 मि.

परमग्रास – 0.658

ध्यान दें –इस ग्रहण के समय भारतीय काल के अनुसार भारत में 16/17 जुलाई की मध्यरात्रि होगी |

यह ग्रहण भारत में तो सर्वत्र स्पर्श (प्रारंभ ) से मोक्ष (समाप्ति) तक दिखेगा ही,यह ऑस्ट्रेलिया,न्यू ज़ीलैण्ड,मलेसिया,ताईवान,जापान,चीन,इंडोनेशिया,पाकिस्तान,अफगानिस्तान,मंगोलिया,ईरान,कजाकिस्तान,द.उ.अफ्रीका,यु.के.एव द.अमेरिका आदि देशो में भी दिखाई देगा |

ग्रहण का सूतक –इस ग्रहण का सूतक 16 जुलाई,सन् 2019 ई. को शाम 04 घं.32 मि. (IST) पर प्रारम्भ होगा |

ग्रहण का राशिफल –यह ग्रहण धनु राशिस्थ उ.षा.नक्षत्र में प्रारंम्भ होकर मकर राशिस्थ उ.षा. नक्षत्र में पूर्ण होगा |स्पष्ट है कि 16/17 जुलाई वाला यह खण्डग्रास चंद्रग्रहण उ.षा.नक्षत्र धनु एवं मकर राशि वाले व्यक्तियों के लिए विशेष कष्टप्रद है |

चंद्रग्रहण का वारफल एवं माहात्म्य –यह ग्रहण धनु एवं मकर राशि को स्पर्श करने से एवं मंगलवार वाले दिन घटित होने से स्नान,दान,जपादि के लिए विशेष महत्वपूर्ण है |मंत्रजाप,दान-पूजा आदि इस समय विशेष फलप्रद लिखे हैं –“बहुफल जपदान –हुतादिके स्मृति –पुरान्विदः प्रवदन्ति हि |”

उ.षा.नक्षत्र में ग्रहण होने से वर्षा अधिक हो,अनाज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो,नारियल,चावल,तिलहन घी,उड़द,आदि दाले महंगी हो |

ग्रहण का राशिगत फल –‘बृहत संहिता’के अनुसार धनु राशि में ग्रहण होने से फल इस प्रकार है –प्रधान पुरुष,मंत्रीगण,घोड़े,मिथिला-पंचाल,देश वासियों,पहलवानों,चिकित्सको,व्यापारीवर्ग,एवं शस्त्रों की जानकारी वाले क्रूर लोगो के लिए धनु राशी का ग्रहण कष्ट प्रद है-

“धन्विन्यमात्यवर वाजि-विदेह मल्लान् |पांचाल वैद्य वणिजो विषमायुधज्ञान् ||”

किंच-मकर राशी में ग्रहण-मोक्ष होने से यह ग्रहण जल-जन्तुओ,मंत्रियो,एवं,चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों,मंत्रवेताओ,चिकित्सको,वृद्धो एवं आयुध जिवियो के लिए कष्ट प्रद है-

“हन्यान्मृगे तु झष मंत्री कुलानि नीचान् |मंत्रोषधीषु कुशलान् स्थाविरायुधीयान् ||

चन्द्र ग्रहण मास फल- क्योकि ये चन्द्र ग्रहण आषाढ़ी पूर्णिमा (आषाढ़ मास) में घटित होगा अत: ‘बृहत् संहिता’ के अनुसार जल प्रपातो के स्रोत एवं नदी नालो के सीमातीक्रमण व पानी की टंकी बाँध आदि के टूटने से विनाश हो| पेयजल के संकट का सामना करना पड़े| नदियों में बाढ़ से हानि हो, फल एवं सब्जी विक्रेताओं को हानि हो गांधार,कश्मीर,पुलिंद,एवं चीन में संकटापन्न स्थिति का सामना करना पड़े| वर्ष में कहीं-कहीं वर्षा हो-

“आषाढ़-पर्वण्युदपान वप्र नदी प्रवाहान् फल-मूल-वार्तान्|गांधार-काश्मीर-पुलिंद-चीनात् हतान् वदेद् मंडल वर्षमस्मिन् ||

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